बुधवार, 16 सितंबर 2009

बाघों के लिए वीआईपी सुरक्षा कवच

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बढ़ते शहरीकरण, सिकुड़ते वनों और शिकारियों से बचाने के लिए बाघों को सुरक्षित रखने की योजना के तहत अब अत्याधुनिक हथियारों से सुसज्जित ‘टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स’ का गठन कर ‘जंगल के राजा’ को वीआईपी सुरक्षा दी जायेगी।प्रदेश के मुख्य वन्य जीव संरक्षक बी के पटनायक ने बताया कि बाघों को संरक्षण प्रदान करने के लिए केन्द्र सरकार की मदद से‘बाघ संरक्षण बल’(टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स- टीपीएफ) का गठन किया जा रहा है।पटनायक ने बताया कि टीपीएफ के गठन की प्रक्रिया शुरु कर दी गयी है। इसके लिए केन्द्र सरकार से 93 लाख रुपए की स्वीकृत भी मिल गयी है। उन्होंने यह भी बताया कि टीपीएफ से जुड़े कर्मचारियों का वेतन सहित पूरा खर्च केन्द्र वहन करेगा।उन्होंने बताया कि टीपीएफ को बाघ संरक्षित क्षेत्र में ही तैनात किया जायेगा। इसके लिए गठित एक कम्पनी में एक डिप्टी कमाडेंट, तीन उपनिरीक्षक, 63 आरक्षी तथा 90 सिपाही होंगे।उत्तर प्रदेश के दुधवा, किशनपुर (लखीमपुर खीरी जिला) तथा बहराइच के कतर्नियाघाट तीनों बाघ संरक्षित क्षेत्र हैं जिनका विस्तार 1362 वर्ग किमी क्षेत्र में है। यहाँ वर्ष 2005 में हुई गणना में 164 बाघ पाए गए थे।दुधवा नेशनल पार्क के सहायक फील्ड निदेशक वी पी सिंह ने बताया कि वर्ष 2005 में वीडियोग्राफी के आधार पर बाघों की गणना की गई थी। इस गणना में दुधवा क्षेत्र में 77, किशनपुर में 29 और कतर्नियाघाट में 58 बाघों के पाये जाने की पुष्टि हुई थी।उल्लेखनीय है कि प्राप्त आँकड़ों के आधार पर पिछले दो दशकों मे उत्तर प्रदेश में बाघों में संख्या में आश्चर्यजनक कमी दर्ज की गयी है। यहाँ वर्ष 1989 में 735 बाघ थे, वहीं वर्ष 2001, 2002 में बाघों की संख्या घटकर मात्र 284 रह गयी। वर्ष 2005 की गणना के बाद बाघों की संख्या 164 रह गयी है। एक वरिष्ठ वन अधिकारी ने बताया है कि केन्द्र सरकार ने बाघों की घटती संख्या को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश के टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में बाघों की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक हथियारों से लैस टीपीएफ के गठन का निर्णय किया। जिन राज्यों में बाघ पाए जाते हैं वहाँ भी ऐसे बल गठित करने के निर्देश दिये गये हैं।सूत्रों ने बताया कि इस बल में युवा वन कर्मियों की तैनाती नये सिरे से की जाएगी और उन्हें अत्याधुनिक हथियार दिए जाएँगे। कार्य बल एक अलग किस्म का बल होगा जो सिर्फ बाघों को अत्याधुनिक तरीके से सुरक्षा देगा।सूत्रों ने बताया कि प्रदेश में बहराइच के सोहलवें संरक्षित वन प्रभाग को भी टाइगर रिजर्व क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव विचाराधीन है।सूत्रों के अनुसार इस योजना को लागू करने के लिए हाल में ही उत्तर प्रदेश सरकार तथा वन विभाग के अधिकारियों के बीच एक बैठक हुई थी। प्रदेश सरकार ने योजना को अमली जामा पहनाने के लिए अपना मन बना लिया है।उन्होंने बताया कि बाघों की सुरक्षा के लिए जो घेरा बनाया जाएगा, उसमे तैनात सुरक्षा कर्मियों को अत्याधुनिक राइफल और नाइन एम एम पिस्टल सहित अन्य हथियार दिए जाएँगे।

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